Pashu ka vilom shabd पशु का विलोम क्या है?

Pashu  ka vilom shabd पशु का विलोम शब्द, पशु शब्द का विपरीतार्थक शब्द है, पशु का उल्टा samrat  ka vilom shabd , Pashu  ka opposite in hindi

शब्द (word) विलोम (vilom)
पशु मनुष्य   
Pashu manusy
            

Pashu  ka vilom shabd  पशु का विलोम क्या है?

‌‌‌दोस्तों यदि हम पशु के विलोम शब्द की बात करें तो यह मनुष्य होता है। पशु और मनुष्य के अंदर वैसे तो कुछ खास फर्क नहीं है। क्योंकि शरीर मनुष्य का होने से कुछ नहीं होता है। कुछ इंसानों की बुद्धि ही पशु जैसी होती है तो वे भी पशु के समान ही होते हैं। इसके बारे मे आपको पता होना चाहिए । दोस्तो ‌‌‌आप तन से क्या हो यह मायेने नहीं रखता है। लेकिन यह मायेने रखता है कि आप बुद्धि से क्या हो ? यह बहुत अधिक मायेने रखता है। इसके बारे मे आपको पता होना चाहिए और आप इस बात को समझ सकते हैं।

Pashu  ka vilom shabd

 यदि आप तन से मानव हैं लेकिन बुद्धि से यदि आप मानव नहीं हैं तो आप दिखेंगे तो मानव ही लेकिन काम जानवरों ‌‌‌ वाले ही करेंगे । आप इस बात को समझ सकते  हैं। और यही आपके लिए सही होगा । इसके बारे मे आप समझ सकते हैं। और यही आपके लिए सही होगा । दोस्तों यदि आप इंसान हैं तो आपके अंदर इंसानों वाले गुण भी होने चाहिए । आप इस बात को समझ सकते हैं। यदि आपके अंदर इंसानों वाले गुण नहीं हैं तो ‌‌‌इस तरह के इंसान इंसान होकर भी जानवर हैं। आप यदि इस दुनिया के अंदर देखते हैं तो आपको पता चलेगा कि बहुत से जानवर इंसान बनकर घूम रहे हैं। और उनकी संख्या बहुत ही अधिक है। और सबसे बड़ी बात यह है कि यह लोग खुद को बहुत ही बड़ा समझते हैं। इनको लगता है कि यह जो कर रहे हैं वही सही है। बाकि जो इनके ‌‌‌जैसा नहीं है वह लगता है।

 आप इस बात को समझ सकते हैं।खैर इस तरह के लोग जो इंसान का रूप लेकर पैदा हो जाते हैं लेकिन काम पशु वाले करते हैं वे समाज और देश के लिए काफी अधिक घातक साबित होते हैं। आपको यह बात याद रखनी चाहिए । कि यदि देश और दुनिया के अंदर यदि इस तरह के लोगों कि  ‌‌‌संख्या के अंदर बढ़ोतरी होती है तो उसके बाद यह समाज को नष्ट कर देते हैं। जरूरी नहीं है कि यह कोई छोटे लोग ही हों बहुत पैसे वाले भी इसके अंदर हो सकते हैं। और बहुत गरीब भी इसके अंदर नहीं हो सकते हैं। आप इस बात को समझ सकते हैं।

‌‌‌दोस्तो इंसान होने की पहचान ही यही है कि आपके अंदर अच्छे गुण होने चाहिए । यदि आपके अंदर अच्छे गुण नहीं हैं तो उसके बाद यह इंसान होने की पहचान नहीं है।  आप एक जानवर हैं। यदि आप अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं तो यह इंसानों का काम नहीं है। यह तो जानवरों का काम होता है। और यदि आप किसी ‌‌‌जानवर को तर्क से नहीं जीत सकते हैं। जानवर के सामने बस बल काम करता है। यदि आप उसके उपर डंडे मारेंगे तो वह लाइन पर आ जाएगा । यदि आप उसके सामने तर्क का प्रयोग करेंगे तो वह कुतर्क करेगा । और कुतर्क का कोई भी इलाज नहीं है। आप इस बात को समझ सकते हैं। यही आपके लिए सही होगा ।

‌‌‌यदि आपको कहीं पर भी कोई कुतर्क करता हुआ मिल जाता है तो आपको उससे बहस नहीं करनी चाहिए।  आपको उसको यह समझाने की जरूरत नहीं है कि भगवान होता है  क्योंकि इस तरह के लोगों की बुद्धि अभी इतनी विकसित नहीं होती है। समय इनको अपने आप ही सब कुछ समझा देगा । आपको जरूरत नहीं है।

‌‌‌सत्य कभी भी छुप नहीं सकता है। बहुत से लोग अक्सर बहस करते हैं कि आत्मा नहीं होती है। बस वहम होता है। लेकिन इस तरह के लोगों से बहस करना व्यर्थ होता है। बस आपको उनको उनके हाल पर छोड़ देना है। समय पर उनको सब कुछ समझ मे आ जाएगा । मरने के बाद जब खुद भूत बनकर घूमेंगे तो उनको पता चलेगा कि भूत होता ‌‌‌ है या फिर नहीं होता है। आप इस बात को समझ सकते हैं और यही आपके लिए सही होगा । इसके बारे मे आपको पता होना चाहिए । तो जब इंसान को यह पता चलता है जोकि जानवर हैं कि उनको कोई दंडित करने वाला है तो वे इस पर भरोशा नहीं करते हैं। उनको लगता है कि जो देख रहे हैं वही सच है।

‌‌‌लेकिन कुछ भी हो पशु तो पशु ही रहता है। और यह वह लोग होते हैं जोकि खुद को कभी भी बदलना ही नहीं चाहते हैं । आप इस बात को समझ सकते हैं मतलब यही है कि यह बदलने पर भरोशा नहीं करते हैं। यह जैसे हैं वैसे ही रहना चाहते हैं।

‌‌‌आप क्या हैं यह मायेने नहीं रखता है आप अभी क्या हैं ? यह बहुत अधिक मायेने रखता है। इसके बारे मे आपको पता होना चाहिए और आप इस बात को समझ सकते हैं। और यही आपके लिए सही होगा । इसके बारे मे आपको पता होना चाहिए ।

‌‌‌इस तरह से दोस्तों आप यदि इंसान खुद को समझते हैं तो आपको एक इंसानों वाले काम करने चाहिए । आप इस बात को समझ सकते हैं। लेकिन यदि आप खुद को इंसान समझते हैं। लेकिन यदि आपके अंदर गुण जानवर के हैं तो आपको उन गुणों को दूर करने के बारे मे विचार करना चाहिए ।

‌‌‌इस तरह से दोस्तों पशु की यदि हम बात करें तो पशु का मतलब होता है जिसके पास बुद्धि नहीं है। एक पशु सिर्फ इतना ही करता है कि उसे बस पेट की चिंता होती है। और यदि उसका पेट भर जाता है तो उसके बाद वह आराम से लेट जाता है। और उसे किसी की चिंता नहीं होती है।

‌‌‌और आजकल तो यही हाल इंसानों का होता जा रहा है उनको भी बस अपनी चिंता होती है। खुद का पेट भरा होना चाहिए । दूसरों को उनसे कोई भी मतलब नहीं है। और वे दूसरे की मदद करना भी नहीं चाहते हैं चाहे कुछ भी हो जाए।

‌‌‌लेकिन यदि कोई सही इंसान है तो फिर वह जरूरतमंदों की मदद जरूर ही करता है।

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