komal ka vilom shabd कोमल का विलोम शब्द क्या होगा ?

कोमल का विलोम शब्द, कोमल शब्द का विपरीतार्थक शब्द है, कोमल का उल्टा , komal ka vilom shabd

शब्द (word) विलोम (vilom)
कोमलकठोर  
KomalKathor
    soft    Hard

‌‌‌कोमल का विलोम शब्द और अर्थ

‌‌‌कोमल का विलोम शब्द और अर्थ

‌‌‌कोमल का मतलब नर्म होता है।और इसके अन्य अर्थ मुलायम ,नर्म ,सुकमार और नाजुक होते हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ पदार्थ कठोर होते हैं जैसे पत्थर और लकड़ी कठोर हैं। लेकिन रबड़ नर्म होता है इनके मुकाबले । और कपड़ा कोमल भी होता है। अक्सर नर्म चीज के लिए कोमल शब्द प्रयोग किया जाता है लेकिन ‌‌‌कोमल का मतलब है जो अधिक नर्म हो उसके लिए कोमल वर्ड प्रयोग मे लिया जाता है।यह तो हुई पदार्थों की बात अब इंसान की जबान भी कोमल और कठोर होती है। आपने देखा होगा कि कुछ लड़कियों की आवाज काफी सुंदर होती है और वह सुनने मे अच्छी लगती है। इस प्रकार की आवाज को कोमल आवाज कहा जाता है।

‌‌‌एक होता है कोमल व्यवहार इसका मतलब यह है कि जब हम किसी के साथ नाजुक व्यवहार करते हैं या काफी सुंदर व्यवहार करते हैं तो उसके लिए कोमल व्यवहार शब्द का प्रयोग किया जाता है। और कई बार जब पौधे से सुंदर कोपल निकलती हैं तो उसके लिए भी कोमल शब्द का प्रयोग किया जाता है। कोमल का मतलब नाजुक  ‌‌‌कोंपले ।

‌‌‌कठोर का अर्थ और मतलब

कठोर का मतलब जिसके अंदर लोच नहीं हो या जिसको दबाया नहीं जा सकता है। आप एक कांच को दबा नहीं सकते हैं क्योंकि यह कठोर होता है। यदि आप इसको अधिक दबाएंगे तो वह टूट जाएगा ।इसके अलावा लकड़ी भी कठोर होती है क्योंकि इसको भी दबा नहीं सकते हैं आप हालांकि कुछ पदार्थ ऐसे होते ‌‌‌हैं जोकि कम कठोर होते हैं।जैसे प्लासिटक  को आप इसके अंदर ले सकते हैं। यह तो हुई पदार्थ की बात । अब कई बार कठोर शब्द भी हमारे मुख से निकल जाते हैं। कठोर शब्द का मतलब यह है कि जो शब्द आपके लिए असहनीय हैं तो उनको कठोर शब्द हम कहेंगे । जैसे यदि कोई आपको मां की गाली देता है तो यह कठोर शब्द ‌‌‌कहलाते हैं।क्योंकि यह अगले इंसान के दिल पर जाकर लगते हैं। इसी प्रकार से यदि आपको ऐसे कोई शब्द कहते जो आपको अपमानित करें तो यह भी कठोर शब्द ही तो होंगे ।

‌‌‌कोमल वचन कहानी

‌‌‌प्राचीन काल के अंदर गुरूकुल हुआ करते थे ।एक गुरूकुल के अंदर  4 शिष्य थे । वे काफी सालों से शिक्षा ग्रहण कर रहे थे आज उनका ज्ञान पूर्ण हो चुका था तो गुरू ने उनको अपने पास बुलाया और कहा………..आज तुम सब लोगों का ज्ञान पूर्ण हो चुका है। और मैं तुम लोगों की परीक्षा लेना चाहता हूं क्या तुम इसके ‌‌‌लिए तैयार हो ?

……..हां हम तैयार हैं । आप बस आज्ञा दिजिए ।

…….तुम सब अलग अलग दिशाओं के अंदर जाओ और एक महाज्ञानी इंसान को खोज कर लाओ जो जीते जी मोक्ष को प्राप्त कर चुका है।

सभी शिष्यों को काफी प्रसन्नता हुआ । और चारो चारो दिशाओं के अंदर निकल पड़े ।

‌‌‌सबसे पहले देवराज कुछ दूरी पार करते हुए एक गांव के अंदर पहुंचा और वहां के लोगों से पूछा सबसे ज्ञानी कौन है यहां पर आस पास ? तो लोगों ने उसको 6 ज्ञानी लोगों के नाम बताए । वह उन सभी से मिला और उनमे से एक महा ज्ञानी को चुन लिया । जिसे वेद पुराण बस आता था।

‌‌‌ ‌‌‌उसके बाद दूसरे शिष्य विष्णुदत की बारी थी।उसने अधिक दिमाग नहीं लगाया और पास के मठ मे गया और उसी के एक पंडित के चरणों मे गिरकर बोला की आप महाज्ञानी हैं तो आप मेरे साथ इस दिन चलना । और मैं आपको आपको स्वर्ण मुद्राएं दूंगा तो वह तैयार हो गया ।

‌‌‌अब तीसरा शिष्य गुमान था। वह तो काफी आलसी था तो उसने किसी भी एक इंसान को पकड़ा जो उसे एक किसी शिव मंदिर के अंदर काफी सालों से पूजा करता था। उसने उसको तैयार कर लिया।

उसके बाद शिष्य जिसका नाम सुधाकर था।वह काफी बुद्धिमान इंसान था। और वह भी कई जगह घूमा और पूछा कि सबसे बुद्धिमान इंसान कौनसा है ?तो उसने भी 20 बुद्धिमान लोगों की लिस्ट तैयार की और उनमे से हर किसी के पास जाता और उसे गाली देता । और बदले मे वह मार खाता । ‌‌‌इस प्रकार से उसने भी काफी मुश्किल से एक ज्ञानी  इंसान तलास कर लिया और चारो ज्ञानी इंसान को लेकर तय दिन गुरू के पास गए ।

‌‌‌……….हां तो देवराज आपके लाए ज्ञानी जन यह दावा करते हैं कि वह अच्छे ज्ञानी हैं?

……हां गुरूदेव । देवराज ने कहा

…..तो देवराज के ज्ञानी जन आप क्या जानते हैं ?

……सब कुछ वेद पुराण और आप जो चाहें पूछ सकते हैं ?

……नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है। यह बताओं कितना धन है तुम्हारे पास?

.. ‌‌‌कुछ अधिक नहीं है जरूरत के अनुसार ही है।

‌‌‌उसके बाद दूसरे विष्णुदत्त के ज्ञानी को बुलाया गया । जिसको देखते ही गुरू ने रिजेक्ट कर दिया कि यह मोक्ष का अधिकारी नहीं है क्योंकि यह अभी भी लोभ मे फंसा हुआ है।

उसके बाद गुमान के ज्ञानी को भी गुरू देव ने नकार दिया क्योंकि वह एक शिव भगत जरूर था लेकिन उसके अंदर लालसा और चिंताएं ‌‌‌अभी भी मौजूद थी।

‌‌‌……..सुधाकर तुम्हारा ज्ञानी कहां पर है ?

…….जी गुरूदेव वो रहा । सबने देखा कि एक पागल की तरह दिखने वाला इंसान कोने के अंदर आराम से बैठा हंस रहा है।

….सुधाकर यह किसको उठा लेकर आया है ?पागल को लाने के लिए नहीं कहा था। अन्य लोग बोले थे

……ओह सुधाकर सच मे कमाल है । गुरूदेव बोले और  ‌‌‌गुरूदेव उसके पास गए फिर बोले ………..तुम्हारा नाम क्या है जो असली है ?

………मेरा कोई नाम नहीं है। वह पागल बोला

…….मेरा मतलब तुम्हारे शरीर का नाम ?

………ओ पागल समझो ?

…… ‌‌‌तुम बेवकूफ हो और गुरू ने भयंकर तरीके से उस पागल को लताड़ा ।लेकिन उसके बाद भी वह हंसता रहा जैसे कुछ हुआ ही नहीं

…..गुरूदेव आपको यह वचन शोभा नहीं देते हैं।

…….मगर क्यों ?

……क्योंकि आप ज्ञानी हैं।

……हम तुम्हें 10 किलो स्वर्ण देंगे यदि तुम इस विष्णुदत्त को यहां से बंदी बनाकर ‌‌‌ले जाओ तो ? गुरूदेव ने कहा था।

—– ‌‌‌जब घड़ा भर जाता है ना तब उसके उपर पानी डालने का कोई फायदा नहीं होता है गुरूदेव ।मुझे सोने की जरूरत नहीं है क्योंकि मेरे पास जो है वह सोने से अधिक उपयोगी है जिसको बेचा और खरीदा नहीं जा सकता है। मुझे प्रतियोगिता नहीं करनी है। वरन मुझे पूर्णता की तरफ बढ़ना था। बेवकूफ लोग प्रतियोगिता करते हैं।

‌‌‌और उसके बाद जोर जोर से हंसता हुआ वही पागल जाने लगा ।

…..सचमुच तुम मोक्ष के अधिकारी हो । और गुरूदेव उसके चरणों मे गिर पड़े । उस पागल ने गुरूदेव को उठाया और बोला ……गुरूदेव आपको यह सब करना शोभा नहीं देता है। यहां कोई छोटा बड़ा नहीं है। सब उसी के सकास से चल रहा है। ज्ञानीजन जानते हैं।

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